जनम सफल हो जाय तुम्हारो
चेतन देव की सेव करो नर, (1)
जनम सफल हो जाय तुम्हारो
घट घट पूरण एक निरंजन, (2)
द्वैत भाव सब दूर निवारो (3)
हिरदे अन्दर मन्दिर मांही,
जगमग जोत जगे उजियारो
प्रेम पुष्प से पूजन कीजे,
मन दीपक धर ध्यान विचारो
“ब्रह्मानन्द” उलट सुरती को, (4)
कर दर्शन भव बन्धन टारो










