जनम जनम के चक्कर खा कर

0
67

जनम जनम के चक्कर खा कर

जनम जनम के चक्कर खा कर
हीरा जीवन मिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता

अजर अजन्मा अमर जीव का
नरतन उत्तम चोला
उपलब्धि नहीं मिली आज तक
भेद किसी ने न खोला
ना तो तुझको मोल मिलेगा
ना दर्जी से सिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता
जनम जनम के चक्कर खा कर
हीरा जीवन मिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता

सृष्टि के अनमोल पदार्थ
जो भगवान् बनाता
वही कुशल कारीगर ही इस
चोले का निर्माता
जिसकी मर्जी बिना जगत् में
पत्ता तक ना हिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता
जनम जनम के चक्कर खा कर
हीरा जीवन मिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता

कुन्दन बना सोना जब
इसको आँच तपाती
छेनी से छिल कर हीरे की
चमक और बढ़ जाती
“प्रभु” मिले तो हँस कर झेलो
जितना संकट झिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता
जनम जनम के चक्कर खा कर
हीरा जीवन मिलता
शुभ कर्मों के फल स्वरूप
ये फूल चमन में खिलता