जाना मैंने जनक जननी
जाना मैंने जनक जननी,
भाई बहन को जाना है,
आना-जाना, जाना है,
और पीना-खाना जाना है।
अकड़ जाना, मुकर जाना,
लड़ना झगड़ना जाना है।
ओउम् नाम को जाना,
जो संपत्ति का खजाना है।
शत्रु जाना मित्र जाना,
अपना पराया जाना है।
कुटम्ब, कबीला सभी,
धीरे-धीरे छोड़ जाना है।
सब कुछ जाना,
पर कुछ भी न जाना,
यदि उसको न जाना है।
जिसके पास तुम्हें और हमें जाना है।
श्रेयांसि बहुविघ्नानि-भले कार्यों
में अनेक विघ्न आते हैं।










