जान दे दी तू ने जग लई बन्देया ।

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जान दे दी तू ने जग लई बन्देया ।

तर्ज: कैसेट ऋषि के तराने में सुने

जान दे दी तू ने जग लई बन्देया ।
वे ऋषिया तेरी गल विच सच्चाई है ।
ओ तू ते दुनिया जगाई है ।।

एक ईश्वर दा सारे जग नू तू ही पाठ पढ़ाया ।
परमेश्वर दा ना ओ३म् है संगताँ नूँ बतलाया ।
उसकी कोई नहीं मूर्ति – गल तू ने समझाई ।।

स्वर्ग नरक है इस धरती पर तू ने बात बताई ।
जीव की सेवा जप तप तीरथ नारी शक्ति जगाई ।
स्वस्ति पंथा मनु चरेम की तूने अलख जगाई ।।

भूत प्रेत और सूर्य ग्रहण या ज्योतिष लगन के किस्से।
जन्म पत्र नहीं शोक पत्र है दयानन्द ने दस्से ।
जीवित मात पिता की सेवा सच्ची भक्ति बताई ।।

लोगों सुन लो दयानन्द ने छूआ छूत मिटाया ।
आडम्बर नंू दूर करन लई आर्य समाज बनाया ।
दयानन्द जया र्नइं कोई मिलनाँ ’कंचन’ बात बताई ।।

रचना:- कंचन कुमार