जहान में जो घड़ा गया है
जहान में जो घड़ा गया है
आखिर एक दिन में वो चूर होगा।
अकड़ने वालों का देख लेना
पड़ा जमों पर गरूर होगा।
बुनेगा जैसा ऐ मानव थाना
उसी तरह का मिलेगा जामा।
किताब में जो लिखा गया है
तो जरूर होगा जरूर होगा।
बड़ी ये लम्बी है रात काली
क्या सोचता है ओ जर के माली।
‘पथिक’ ना जब तक दिया जलेगा
कभी ना कमरे में जूर होगा…।
जो सूरमा आँखों में लगाया
को ही ना तुझको नजर में आया।
भला वा कैसे देगा दिखाई जी
तेरी नजरों से दूर होगा….।।
भंवर में डूचेंगे और जो तेरेंगे किया
जिन्होंने वो ही भरेंगे।
तेरा तो होगा ना बाल बांका
अगर तूं नर बेकसूर होगा।










