जहालत जो यूं ही रहेगी

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जहालत जो यूं ही रहेगी

जहालत जो यूं ही रहेगी तो भारत का
ढंग क्या होगा खिले जो फूल आशा के,
तो फिर उनका रंग क्या होगा।।टेक ।।
मिलेंगे गुन्डागर्दी के यहां परमिट
हकूमत से तो फिर सरकार का
बर्ताव अच्छों के संग क्या होगा।।1।।

दया और धर्म का जब नाम
यहां से मिट ही जायेगा तो
फिर धर्मात्माओं का
पाप से जंग क्या होगा।।2।।

खुशामद चापलूसी की रहेगी
नीति जब अपनी दबा जो गैर के
नीचे व भारत का अंग क्या होगा।।3।।

बना कर नियम जब गन्दे मतों से
पुष्टि करते हैं तो शोभाराम वह
कानून गन्दा भंग क्या होगा।।4।।