जागो जागो नींद से जागो

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जागो जागो नींद से जागो

जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका
उषा ने कर दी विच्छिन्न
घोर तमस की दशा
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका

सुरभित तरुवर उपवन
लगे झूमने महक भरे
आल्हादक चारु प्रभात
सोये जन जाग पड़े
देह-गतिक रथ चला है
युगल-अश्व प्राणायाम का
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका

योगांगों का कर अभ्यास
आलस को त्वरित तज दें
संध्या और यज्ञ को कर
ओ३म् नाम का जाप करके
पशुओं में ना यह क्षमता
सत्कर्म मानव-साधना
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका

कवियों का है काव्य-कथन
है श्रेष्ठ साहित्य संगीत
जो इससे रहा विहीन
मानव पशु बिना पूंछ सींग
साहित्य-संगीत तेरा
भाग्य है आनन्द का
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका

यह प्राण और अपान
पशु-पक्षी भी कर लेते
पर उनकी दिशा सीमित
उत्तरोत्तर हम बढ़ते
अश्वी-युगल मानवों को
देते हैं सोमरस सुधा
प्राणी जगत् में छाया
समा भी दो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका

ऐ अश्वी-युगल ! चालक
उत्तम हो तेरा सौभाग्य
सही कर अपना उपयोग
उन्नति का है साध्य
जागरूक उद्बुद्ध बन तू
अश्वि -रथ को ठीक चला
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका
उषा ने कर दी विच्छिन्न
घोर तमस की दशा
प्राणी जगत् में छाया
समा भी तो चहल-पहल का
जागो जागो नींद से जागो
क्षितिज में सूर्य चमका