जगदीश ज्ञान-दाता, सुख-मूल, शाकाहारी।
जगदीश ज्ञान-दाता,
सुख-मूल, शाकाहारी।
भगवन! तुम्हीं सदा हो,
निष्पक्ष न्यायकारी।।
सब काल सर्वज्ञाता,
सविता पिता विधाता।
सब में रमे हुए हो तुम,
विश्व के बिहारी।।
कर दो बलिष्ठ आत्मा,
घबरायें ना दुःखों से।
कठिनाइयों का जिससे,
तर जाय सिन्धु भारी।।
निश्चय दया करोगे,
हम मांगते यही हैं।
हमको मिले स्वयं ही,
उठने की शक्ति सारी।।










