कृतज्ञता
जगत में उनकी मिटी है चिन्ता,
जो तेरे चरणों में आ गये हैं,
वही हमेशा हरे-भरे हैं,
जो तेरे चरणों में आ गये हैं।
न पाया तुझ को वजीर बनकर,
न पाया तुझको फकीर बनकर,
उन्हीं को दर्शन हुए हैं तेरे,
जो तेरे चरणों में आ गये हैं।
जगत् में उनकी मिटी है चिन्ता……..
न पाया तुझको किसी ने बल से,
न पाया तुझको किसी ने छल से।
वही परम-पद को पा गये हैं,
जो तेरे चरणों में आ गये हैं।
जगत् में उनकी मिटी है चिन्ता…….
किसी ने जग में करी बुराई,
किसी ने जग में करी भलाई।
वही सुमार्ग पर चल पड़े हैं,
जो तेरे चरणों में आ गये हैं।
जगत् में उनकी मिटी है चिन्ता……
प्रभु जी विनती सुनो हमारी,
संवारो बिगड़ी दशा हमारी।
वे आसरों का तुम आश्रय हो,
हम तेरे चरणों में आ गये हैं।।
जगत् में उनकी मिटी है चिन्ता……..










