जगत् में समय बड़ा बलवान्, सबके सर पर राज करे

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जगत् में समय बड़ा बलवान्, सबके सर पर राज करे

जगत् में समय बड़ा बलवान्
सबके सर पर राज करे
हो निर्धन या धनवान्
जगत् में समय बड़ा बलवान्

पल में राज पलट जाते हैं
तख़्तो ताज उलट जाते हैं
घटने वाले बढ़ जाते हैं
बढ़ने वाले घट जाते हैं
पल में क्या से क्या हो जाए
हर कोई हैरान
जगत् में समय बड़ा बलवान्

कल था मस्त जो रङ्ग रलियों में
रङ्ग महल फूलों कलियों में
आज उसी को हमने देखा
भीख माँगते इन गलियों में
समय की उँगली पर दुनिया में
नाचे हर इनसान
जगत् में समय बड़ा बलवान्

इक समय खुशियाँ लाता है
मानव गाता मुसकाता है
ऐसा दिन भी आता है जब
दिल का बाग उजड़ जाता है
पल में आँसू बन बहती है
चेहरे की मुसकान
जगत् में समय बड़ा बलवान्

“पथिक” दुख में फँसते देखा
बीच भँवर के धँसते देखा
उठी पलक को लहरों पर ही
खिलखिलाते हँसते देखा
और उठाकर खुद साहिल पे
छोड़ गया तूफान
जगत् में समय बड़ा बलवान्
जगत् में समय बड़ा बलवान्

रचनाकार व स्वर :- स्मृतिशेष पूज्य पण्डित श्री सत्यपाल जी “पथिक” अमृतसर (वैदिक भजनोपदेशक)