जगत में चिन्ता मिटी उन्हीं की, जो तेरे चरणों में आ चुके हैं।

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भक्ति

जगत में चिन्ता मिटी उन्हीं की।
जो तेरे चरणों में आ चुके हैं।
वो ही हमेशा हरे भरे हैं।
जो तेरे चरणों में आ चुके हैं। ।।।।

न पाया राजा वजीर बनकर।
न पाया तुझ को फकीर बनकर ।।
उन्हीं को दर्शन हुए हैं तेरे।
जो तेरे चरणों में आ चुके हैं। ।2।।

न पाया तुझको किसी ने बल से।
न पाया तुझको किसी ने छल से।।
वहीं परमपद को पा गये हैं।
जो तेरे चरणों में आ चुके हैं। ।3।।

किसी ने जग में करी भलाई।
किसी ने जग में करी बुराई ।।
वही सुमार्ग पर चल पड़े हैं।
जो तेरे चरणों में आ चुके हैं। ।4।।

प्रभु जी विनती सुनो हमारी।।
बनाओ बिगड़ी दशा हमारी।।
निराश्रितों के हो आसरा तुम।
तुम्हारे चरणों में आ चुके हैं। ।।5॥