जग में एक परिवार हमारा।
जग में एक परिवार हमारा।
सबका एक पालन हारा॥ जग में….
मत मजहब पन्थों में कर
लिया इन्सा का घटवारा।
एक पिता के पुत्र हैं फिर
क्यों मैं न्यारा तू न्यार॥1॥ जग…
चन्द्र की शीतलता है
सबको सूरज का उजियारा।
जल पीते वायु में स्वांस ले है
जीने का सहारा ॥2॥ जग…
उसके लिए सब एक,
मूंछ दाढ़ी का भेद तुम्हारा।
अपने आप बनाया
चर्च मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा॥३॥
छोटी बड़ी सभी की उंगली
देख लिया जग सारा।
जलवायु के परिवर्तन से
कोई गोरा कोई काला॥4॥ जग…
स्वर्ग इसी धरती पै नर्क का
बना दिया क्यों द्वारा।
स्वयं शान्ति के आंगन में
फेंक रहे अंगारा ॥5॥ जग…
‘कर्मठ’ दिया विधान वेद का
ज्ञान प्रभु ने प्यारा।
अमृत तजकर क्यों पीते हो
सागर का जल खारा॥6॥जग…










