जग को जगाने वाला-आर्यसमाज है।
जग को जगाने वाला-
आर्यसमाज है।
जग की पुकार है ये
युग की आवाज है।
ईश की उपासना का
रास्ता दिखा दिया।
जड़ की आराधना के
पाप से बचा लिया।
पाखंड ढोंग जिसके
भय से डोल रहा आज है-
आर्यसमाज….।
ठाकुरों की ठोकरों ने
कर दिया बेहाल था।
दम्भियों पाखण्डियों का
फैला हुआ जाल था।
जिसने दौन देश जाति की
बचाई लाज है-आर्यसमाज….।
नारियाँ भी वेद का हैं
गान आज कर रही।
रूढ़ियाँ कुरीतियाँ हैं
अपने आप मर रही।
वेद के प्रकाश का जो कर रहा
सुकाज है-आर्यसमाज…..
कौन भोगवाद से जो
विश्व को बचाएगा।
पाप-पुण्य क्या है कौन
आज ये सुझाएगा।
मानवीय रोग का बस
एक ही इलाज है-आर्यसमाज….।
कौन है जो आर्यों
की भावना जगा गया।
कौन मौत से हमें जो
जूझना सिखा गया।
श्रद्धानन्द, लेखराम,
प्यारा हंसराज है-आर्यसमाज….।
देशहित में वार दी
अनेक ही जवानियाँ।
रक्त से लिखी हैं इसने
देश की कहानियाँ।
लाजपत लुटाके आज पा लिया
स्वराज है-आर्यसमाज….।










