जग को जगाने वाला आर्य समाज है।

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जग को जगाने वाला आर्य समाज है।

जग को जगाने वाला आर्य समाज है।
जग की पुकार है व युग की आवाज है।।
ईश की उपासना का रास्ता बता दिया।
जड़ की आराधना के पाप से बचा लिया।।
ढोंग-ढोंग जिनके भय से डोल-रहा आज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।1।।

कौन था जो सोई हुई, जाति को जगा गया।
विधवा अछूतों को, वह गले से लगा गया।।
दया का भण्डार, दयानन्द महाराज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।2।।

ठाकुरों की ठोकरों ने, कर दिया बेहाल था।
दम्भियों का फैला हुआ, चारों ओर जाल था।
दीन देश जाति की, बचाई जिसने लाज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।3।।

नारियाँ भी वेद का, हैं गान आज कर रहीं।
रूढ़ियाँ कुरीतियाँ है, अपने आप मर रहीं।
वेद के प्रकाश का जो कर रहा सुकाज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।4।।

कौन है जो आर्यों की भावना जगा गया।
कौन है जो मौत से जूझना सिखा गया।।
श्रद्धानन्द, लेखराम, प्यारा हंसराज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।5।।

वार दी देश हित अनेकों की जवानियाँ।
रक्त से लिखी है इसने देश की कहानियाँ।
लाजपत लुटा के आज पा लिया स्वराज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।6।।
कौन भोगवाद से, जो विश्व को बचायेगा।
पाप पुण्य क्या है, कौन विश्व को सुझायेगा।
मानवीय रोग का तो, एक ही इलाज है।
आर्य समाज है यह आर्य समाज है।।7।।

संगठित कार्य, दृढ़ता, उत्साह और समन्वयात्मकता की दृष्टि से आर्य समाज की क्षमता का सामना कोई समाज नहीं कर सकता – सुभाष चन्द्र बोस