जाग गये तब सोना क्या रे।
जाग गये तब सोना क्या रे।
बीता समय, बात जबान से,
तीर कमान से निकलने के बाद
कभी वापिस नहीं आते।
जो नर तन देवन को दुर्लभ,
सो पाया तब रोना क्या रे।।
हीरा हाथ अमोलक आया,
काँच भाव से खोना क्या रे।।
मन मन्दिर नहीं कीना निर्मल,
बाहर का तन धोना क्या रे।।
ओ३म् नाम का सुमरिन कर ले,
अन्त समय मे होन क्या रे।।










