जब तेरी डोली निकाली जायेगी।

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जब तेरी डोली निकाली जायेगी।

जब तेरी डोली निकाली जायेगी।
बिन मुहूर्त के उठा ली जायेगी ।।

जर सिकन्दर क्या यहां पर रह गया।
मरते दम लुकमान भी यह कह गया।
ये घड़ी हरगिज न टाली जायेगी।।

२. उन हकीमों से यह पूछो बोलकर।
दावा करते थे किताबें खेलकर।
यह दवा हरगिज न टाली जायेगी।।

३. क्यों गुलों पर ही रहे बुलबुल निसार।
पीछे माली है खड़ा हो खबरदार।
मारकर गोली गिरा ली जायेगी।।

४. ये मुसाफिर क्यों परस्ता है यहां।
यह किराये का मिला तुझको मकां।
कोठड़ी खाली कराली जायेगी।।

५. धर्मराज जब लेगा तेरा हिसाब।
फिर वहां पर क्या जवाब देगा जनाब।
जब बही तेरी निकाली जायेगी।।