जब सिर पर तेरा हाथ
जब सिर पर तेरा हाथ,
नाथ मैं क्यों डोलूँ।
जब मिल गया तेरा साथ,
नाथ मैं क्यों डोलूँ ।।
जब से दर पकड़ा प्रभु तेरा,
दूर हुआ है सब गम मेरा,
अब तुम ही बता के जाओ,
नाथ………
जब से सौंप दी तुझको नैया,
आप ही बन गये. इसके खिवैया।
मेरी बिगड़ी बना दो नाथ,
नाथ मैं…….
जीवन में जब आई निराशा,
तुमने बँधाई बनके आशा।
कभी तात बने कभी मात,
नाथ मैं……..
तेरे पथ से कभी न डोलूँ,
नाम तेरा सदा मुख से बोलूँ।
मेरी विनती यही है नाथ,
नाथ मै…….
पुण्य की बेल घटी, पाप बढ़ते जाते हैं।
इसलिए हर जगह, सन्ताप बढ़ते जाते है।।
अच्छे पीये तो पनपते है, पानी देने पर।
झाड़ झंखाड़ तो अपने आप बढ़ते जाते हैं।।










