जब भी प्रभु याद तेरी दिल में बसी जाती है

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जब भी प्रभु याद तेरी दिल में बसी जाती है

तर्ज: मोसे मत पूछ मेरे इश्क में

जब भी प्रभु याद तेरी दिल में बसी जाती है

प्रेम श्रद्धा मेरे मन का दिया जलाती है ॥

पहले मक्सद नहीं समझा था जग में आने का

चक्रव्यूह में न मिला मार्ग निकल पाने का

अब ये जाना के प्रभु तू ही मेरा साथी है ॥ जब भी…

मन के दर्पण में तेरे प्रेम की प्रभु मूरत है

भूल बैठा हूँ प्रभु खुद ही अपनी सूरत मैं

जहाँ देखूँ, मैं छबी तेरी नज़र आती है ॥ जब भी…

चाहे दुःख आए या सुख में ना तुझे भूलूँगा

तेरे ही प्रेम हिंडोले में प्रभु झूलूँगा

देखूँ तुझे पाने की वो शुभ घड़ी कब आती है ॥ जब भी…