ईश्वर को मानते हैं लोग, जानते नहीं।

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ईश्वर को मानते हैं लोग, जानते नहीं।

ईश्वर को मानते हैं लोग,
जानते नहीं।
मृत्यु को जानते हैं,
मगर मानते नहीं।
कैसा अंधेर है यह,
कि छोटी-छोटी बात की,
असलियत जानते हुए भी,
जानते नहीं।।1।।
ईश्वर को मानते हैं लोग…….

दुनिया को लूटते हैं बड़े इल्मो हुनर से,
चादर फरेब की ये,
कभी तानते नहीं।।
तिनका किसी की आँख का,
देखें ये बार-बार,
अपनी में हो शहतीर भी,
तो मानते नहीं।।2।।
ईश्वर को मानते हैं लोग…….

सच्चाई जिन्दगी में,
भूलकर न आ सकी,
कहने को कभी झूठ,
ये बखानते नहीं।
मतलब पड़े तो लोग,
इर्द-गिर्द घूमते।
जब वक्त निकल जाये,
तो पहचानते नहीं।।3।।
ईश्वर को मानते हैं लोग……

बस एक ही को जानकर,
उसी के हो गए,
दर-दर की खाक हम
तो ‘पथिक’ छानते नहीं।।4।।

ईश्वर को मानते हैं लोग जानते नहीं। मृत्यु को जानते हैं, मगर मानते नहीं।