भक्ति
ईश्वर के गुण गाओ, वह सबका स्वामी है।
ओ३म् ओ३म् ही ध्याओ, वह सबका स्वामी है।।
मानुष का चोला है पाया, इसको है क्यों दाग लगाया।
मन को शुद्ध बनाओ, वह सबका स्वामी है।।1।।
वह ही माता-पिता हमारा, सभी बन्धुओं से है प्यारा।
उसको न बिसराओ, वह सबका स्वामी है।।2।।
उठो सबेरे मन्दिर जाके, सन्ध्या हवन करो चित ला के।
जीवन सफल बनाओ, वह सबका स्वामी है। ।।3।।
घर अपने को स्वर्ग बनाओ, बच्चों को तुम वेद पढ़ाओ।
आर्य जगत् बनाओ, वह सबका स्वामी है।।4।।
‘नन्दलाल’ न उसे भुलाना, मिलके अच्छे कर्म कमाना।
शरण प्रभु की आओ, वह सबका स्वामी है। ।।5।।










