ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन

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ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन

ईश्वर बिना विचारिये
सृष्टि रचाये कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन

जो कहते हैं कि जगत्
अपने आप बन गया
नक्षत्र ग्रहों पर कभी
विचार न किया


संभला बिना आश्रयम
पर दिखाये कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन

माता के गर्भ में
हुई तैयार मूर्ति
अंगों की हो रही है
ठीक ठीक मूर्ति


निर्माण शाला में भला
साधन जुटाये कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन

वो कौन है जो कर्म की
व्यवस्था कर रहा
किसके प्रबन्ध में है
प्राणी पर को भर रहा


नियन्त्रण करता है
नियन्ता के सिवाय है कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन

नीचे तो जल है
जल पे थल की सृष्टि दी रचा
सागर के सीने पर है
मानों नाव दी चला


सोचो तो जल पे मृत्ति कि
नैया चलाये कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन

ईश्वर बिना विचारिये
सृष्टि रचाये कौन
नियमों में प्राणी मात्र को
क्रम से चलाये कौन