ईश्वर भक्ति सत्य धर्म शुभ कर्मों से नहीं प्यार

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ईश्वर भक्ति सत्य धर्म शुभ कर्मों से नहीं प्यार

ईश्वर भक्ति सत्य धर्म
शुभ कर्मों से नहीं प्यार,
पीर, पैगम्बर, पत्थर पूजें
निश दिन दूखी अपार ||1|

जीवित मात-पिता तो
तड़पा-तड़पा कर दिये मार,
फिर करते हैं श्राद्ध जिमाते
हैं कव्वों की लार।।2।।

गोबर की एक बनाई
सांझी गारे का सिंगार,
आठ रोज तक करके
पूजा दई जोहड़ में डार।।3।।

रंग-बिरंग बनाई होई,
लीप-पोत दीवार,
दीवारों से बेटे मांगे यह
अक्ल की मार। ।4।।

दीवाली को सज्जन-दुर्जन
भक्त और मक्कार,
खुले किवाड़ रात दिन
करते लक्ष्मी की इन्तजार ।।5।।

दीवाली के बाद मानवें
गोवर धन त्यौहार,
गोबर का एक पुतला बगड़
में दिया कटड़ा सा मार।।6।।

कूड़ा कर्कट जलाके
होली का करें दाह संस्कार,
मल और मूत्र गारे गोबर
की दुल्हंडी की बौछार ।।7।।।

सत्य सनातन वैदिक
धर्म का करता है प्रचार,
शोभाराम प्रेमी की एक
नहीं माने मूढ़ गंवार ।।8।।