ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
विश्वपति निराकार निरंजन
कण कण में है समाया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
नभ पृथ्वी अग्नि जल
वायु सूरज चाँद बनाया।
यन्त्र बिना बिना हाथ के
तू ने अद्भुत जगत रचाया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
पर्वत से इक पत्थर टूटा
देखत मन हर्षाया।
पत्थर में बसे कीट का
भोजन पत्थर में पहुँचाया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
उमड़ पड़ी घनघोर घटाएँ
नभ से जल बरसाया।
सागर में सब नदियाँ
पहुँची पर बढ़ती में न आया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।
इक राजा इक रंक कहावे
कर्मण का फल पाया।
‘पथिक’ प्रभु तेरे न्यायालय
में सब ने शीश झुकाया।
ईश्वर ! अजब है तेरी माया।










