इस पार भी वो है (तर्ज- मेरा प्यार भी तू है)
इस पार भी वो है,
उस पार भी वो है।
वही कण-कण में
व्यापक रमा है,
वही नजारों में, बहारों में।
वो है अनादि और अजन्मा
जन्म न लेता और न मरता।
देवों का महादेव वही है
सृष्टिकर्त्ता और दुःखहर्त्ता
वही है पालनकर्त्ता इस पार भी वो है…
दूर नहीं वो पिता हमारा पास
हमारे हर क्षण-क्षण में,
बस्ती-बस्ती नगर-नगर में हर
इक घर में हर आंगन में वही है
वन निर्जन में इस पार भी वो है…
फूलों में रंग जिसने डाला
लता देख जिसको मुस्कराती
मधुर स्वरों में कोयल जिसको
मीठे-मीठे गीत सुनाती।
वही है उसका साथी,
इस पार भी वो है…
प्रभु मिलन की चाह यदि
है जीवन अपना स्वयं
निरखले काम क्रोध मद
लोभ छोड़कर प्रेम के
रंग में जीवन रंग ले।
छोड़ के कोठी बंगले,
इस पार भी वो है…










