इस कुल का ये दीपक प्यारा बालक आयुष्मान् हो।
(तर्ज- नगरी-२ द्वारे-२)
इस कुल का ये दीपक
प्यारा बालक आयुष्मान् हो।
तेजस्वी वर्चस्वी निर्भय
सर्वोत्तम विद्वान् हो ।।
परम भक्त बन परम प्रभु का
अपना यश फैलाये ये।
माता पिता की सेवा करके
सच्चा सेवक कहलाये ये ।।
नाम अमर करदे जगती में
सर्व गुणों की खान हो ।१।
बने सुमन सा कोमल सुन्दर
सबको सौरभ दान करे।
दुष्टों से ना डरे कभी भी
श्रेष्ठों का सम्मान करे ।।
मानव धर्म समझकर
चलने वाला चतुर सुजान हो । २।
विजय चौतरफ जय हो
इसकी पावै सुख सम्मान भी।
शतायु जीवन पाकर निर्भय करे
धर्म हित दान भी ।।
नेता बने देश अपने का
जगती में सम्मान हो। ३।










