इस दुनिया में आना-जाना रहे हमेशा जारी।
इस दुनिया में आना-जाना
रहे हमेशा जारी।
संभल मुसाफिर तेरी
इक दिन आने वाली बारी।।
दुनिया में रहने वालों से
टूटे एक दिन प्यार तेरा।
कोठी बंगला धन सम्पदा पर,
रहे नहीं अधिकार तेरा।
इस गाड़ी का न टाइम टेबल,
मास दिवस कोई डेट नहीं।
रहे न टीटी देवे न सीटी,
कभी भी होती लेट नहीं।
बनी न पटरी, रखे न गठरी,
लेती सिर्फ सवारी ।।
इस दुनिया में आना जाना रहे……
क्या राजा क्या रंक
सभी इसी गाड़ी में कर गए सफर।
जिसने इस ड्राइवर को जाना,
वही नाम कर गए अमर।
संभल गए वे बदल गए
‘राघव’ जिन बात विचारी ।।
इस दुनिया में आना-जाना
रहे हमेशा जारी।
संभल मुसाफिर तेरी
इक दिन आने वाली बारी।।
गलतियाँ हमेशा माफ की जा सकती हैं,
यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो।










