इन्सानियत ही सबसे पहले, धर्म है इन्सान का।

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इन्सानियत ही सबसे पहले, धर्म है इन्सान का।

इन्सानियत ही सबसे पहले,
धर्म है इन्सान का।
इसके बाद ही पन्ना खोलो,
गीता और कुरान का।

कौन सा धर्म कहता है,
यह तेरा है, यह मेरा है,
सबके संत कहते हैं,
दुनिया चार दिन का मेला है।
यही चार दिन जीने में,
पहला धर्म इन्सान का।।1।।
इन्सानित ही सबसे पहले, धर्म है…….

प्यार ही है इन्सान का मजहब,
अलग भाषा का मतलब क्या,
राम, रहीम, मीरा और नानक,
सबका यह उपदेश रहा।
धर्म के नाम पर झगड़ा करना,
काम है शैतान का।।
इन्सानित ही सबसे पहले, धर्म है……..

जागो वरना दुनियां का गुलशन,
वीरान हो जाएगा।
मौत की नींद में हर इक इंसा,
बेमतलब सो जाएगा।
इसके बाद ही पन्ना खोलो,
गीता और कुरान का।।
इन्सानित ही सबसे पहले, धर्म है…….