इन्सान संभल कर ध्यान संभल अज्ञान न धोखा खाना

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इन्सान संभल कर ध्यान संभल अज्ञान न धोखा खाना

इन्सान संभल कर ध्यान
संभल अज्ञान न धोखा खाना
जिंदगी का लक्ष्य कभी भूल नहीं जाना।।
है ऊंची-नीची-टेढ़ी, यह जिंदगी ऐ राही राही
तू न विचलना अनगिन भी जो हो तबाही
धमकी देकर मार्ग तेरा तुझसे चाहें छुड़ाना
जिंदगी का लक्ष्य कभी भूल नहीं जाना ।।1।।

लाखों तबाही सहकर अनमोल जीवन पाया
अब तक का सारा जीवन तैने व्यर्थ ही गंवाया
जितना जीवन शेष तेरा यदि चाहे इसे बनाना
जिंदगी का लक्ष्य कभी भूल नहीं जाना।।2।।

विषय रूपी ठंगो से अब तू न ठगा जा
जीवन शेष सारा शुभ कर्म में लगा जा
दुनिया की रंगरलियों से इस मन चंचल को हटाना
जिंदगी का लक्ष्य कभी भूल नहीं जाना।।3।।

धन धाम धरती तज कर जायेगा तू अकेला
हे शोभाराम प्रेमी दो दिन का जगत मेला
सर्वोत्तम मानव जीवन से चाहे लाभ उठाना
जिंदगी का लक्ष्य कभी भूल नहीं जाना।।4।।