इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि

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इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि

इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे
भौतिक यज्ञ की ना यह हवि
जिसे हम उस पे निवारें
सामग्री घृत आदि का वो इन्द्र
बोलो भला उसका क्या करे ?


पाना है उसको यदि
आत्मसमर्पण की हवि
अर्पण कर दे अहंकार बिना रे
इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे

जो भी कुछ करते हैं कार्य
बनके रहें उसमें आर्य
खाना-पीना पूजा दान
भाव ना हों उसमें अदान
होंगे हम पूर्ण तैयार


त्याग देंगे जब अहंकार
“मैं” की भावना के कारण
पहुँचे ना हम इन्द्र के द्वारे
इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे

इन्द्र हैं पूषण्वान्
और है मरुतवान्
इन्द्र है सूर्य वाले
उनसे प्रेरित पवन प्राण
इन्द्र हैं विश्वदेवाय


इन्द्रिय मन बुद्धि सहाय
और अग्नि जल आदि देव
जुड़े रहते हैं उनके सहारे
इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे

सर्वव्यापक वह वायु
गायत्रवेपस झूमाऊँ
भक्ति-गान का चाहक
प्रिय है उसके उपासक
भक्ति गान की तरङ्गे
इन्द्र में भर्ती उमङ्गें


आओ त्याग कर ‘अहम्’
जायें उस पे वारे वारे
इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे
भौतिक यज्ञ की ना यह हवि
जिसे हम उस पे निवारें
सामग्री घृत आदि का वो इन्द्र
बोलो भला उसका क्या करे ?


पाना है उसको यदि
आत्मसमर्पण की हवि
अर्पण कर दे अहंकार बिना रे
इन्द्र राजन को दूँ मैं हवि,
वही है मेरे प्यारे