इक बार भजन कर ले, मुक्ति का यतन कर ले।

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शिक्षा

इक बार भजन कर ले,
मुक्ति का यतन कर ले।
कट जायेंगे जनम मरण,
प्रभु का चिन्तन कर ले।।
इक बार भजन कर ले…….

यह मानव का चोला,
हर बार नहीं मिलता,
जो गिर गया डाली से,
वो फूल नहीं खिलता,
मौका है ये जीवन का,
गुलजार चमन कर ले।।
इक बार भजन कर ले……

नर इन कानों से सुन,
तू ऋषियों की वाणी,
मन को ठहरा कर के,
बन जा आत्मज्ञानी,
जिहवा तो चले मुख में,
अब ओ३म् जपन कर ले।।
इक बार भजन कर ले………..

इस मैली चादर में,
हैं दाग लगे कितने,
पर ज्ञान के साबुन में,
हैं झाग भरे इतने,
धुल जाएगी सब स्याही,
उजला तन मन कर ले।।
इक बार भजन कर ले……

वेदों में गूँज रहीं,
मंत्रों की मधुर ध्वनियाँ,
बलिदान के इस युग गमें,
तू गूँध नई कड़ियाँ,
अब तो प्रभु के आगे,
नीची गर्दन कर ले।।
इक बार भजन कर ले……