हम रुकना झुकना क्या जानें
- हम रुकना झुकना क्या जानें,
हम बढ़ते हैं सीना ताने।
हम सैनिक वीर शहीदों के,
परहित में जिनके शीश करें।
हम दयानन्द के दीवाने-
हम रुकना झुकना क्या जानें।
हम वैदिक नाद बजायेंगे,
सुख-शान्ति जगत् में लायेंगे।
सारी दुनियां हमको मानें-
हम रुकना झुकना क्या जानें।
हम हंस-हंसकर दुःख झेलेंगे,
सर्वस्व धर्म पर दे देंगे।
हम लेखराम से मस्ताने
हम रुकना झुकना क्या जानें।
हम कर्म वचन के सच्चे हैं,
हम धुन अपनी के पक्के हैं।
हम वेदज्योति के परवाने
हम रुकना झुकना क्या जानें।
दुःख आता है तो आने दो,
सुख जाता है तो जाने दो।
हम वीर हैं डरना क्या जानें
हम रुकना झुकना क्या जानें।










