हो सके तो भला कर किसी का जरा

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हो सके तो भला कर किसी का जरा

हो सके तो भला कर किसी का जरा
देखो तो बन के सहारा तू जो साथी बने,
तूझे साथो मिले प्रभु साथी बनेगा तुम्हारा

पत्थरों पे चढ़ा कर के कपड़ा मिष्ठान को
खो रहे है उधर सड़कों पे भुखे नन्गे इन्सान
वो रो रहे है खिलाओ उन्हें, पिलाओ
उन्हें जो पोते है आंसू की धारा ॥१॥

जड़ मूरत की करता है पूजा जींदा
मूरत को देखो भुलाकर उसके बन्दों की
पूजा उसीकी रचना का अपमान ना
कर तेरी वंन्दगी, सफल हो तो भी बन
गरीबो की आखों का तारा ।।२।।