होऽऽऽ… क्यों ना करें आत्मसात्

0
38

होऽऽऽ… क्यों ना करें आत्मसात्

होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

हम सब तो सहमत हैं
वेद पक्षपात रहित है
सृष्टि से ज्ञान है पहला
इन सब में सबका हित है
आत्मा-परमात्मा का यह
सच्चा व्यवहार सिखाएँ
आत्मा-परमात्मा का यह
सच्चा व्यवहार सिखाएँ
सच्चा व्यवहार सिखाएँ
होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

तृण से ब्रह्म पर्यन्त
गुण गाथा गायन उत्तम
वेदों में स्तुतिसमूह
स्तोमवाणी प्रभु दर्शन
आत्मा परमात्मा प्रकृति का
पूर्ण ज्ञान कराए
आत्मा परमात्मा प्रकृति का
पूर्ण ज्ञान कराए
पूर्णत: ज्ञान कराए
होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

जीवन उपयोगी तत्वों
का भी यह ज्ञान कराए
आत्मा को शान्ति देकर
शाश्वत आनन्द दिलाए
ज्ञानी ध्यानी सन्तों के
हृदयों में दर्श कराए
ज्ञानी ध्यानी सन्तों के
हृदयों में दर्श कराए
हृदयों में दर्श कराए
होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

चिन्तन मनन निदिध्यासन
सही रीत वेद सिखाए
वेदों को जो ना जाने
जग-ईश्वर में भरमाये
अविनाशी सर्वव्यापक
वेद सर्वरूप जनाए
अविनाशी सर्वव्यापक
वेद सर्वरूप जनाए
वेद सर्वरूप जनाए
होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

बिन ज्ञान के हम कैसे
अनुष्ठान कर सकते हैं
वेद ज्ञान धारण करके
सोमरस पा सकते हैं
ज्ञान कर्म उपासना के
मार्ग तो वेद ले जाए
ज्ञान कर्म उपासना के
मार्ग तो वेद ले जाए
मार्ग तो वेद ले जाए
होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए

होऽऽऽऽऽऽऽ
क्यों ना करें आत्मसात्
वेदों की कही बात
जो ज्ञान दिलाए
और जीना भी सिखाए