हो…अब ना छुपाऊँगा

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हो…अब ना छुपाऊँगा

तर्ज – सपनों में आऊँगी

हो… अब ना छुपाऊँगा,
सबको बताऊँगा।
अपनी जुबां से मैं,
गाके सुनाऊँगा।
जिसने रचाया संसार,
वो दाता है जगदीश्वर।

  1. सूरज चाँद सितारे ये,
    चारों ओर नज़ारे ये
    वो ही देता नूर इन्हें,
    है उसी के सहारे
    ये अब तक ना तू जाना,
    ना अब तक पहचाना
    वो ही है रे साथी,
    वो ही तेरा ठिकाना हो…..

वादा निभाऊँगा, अब ना भुलाऊँगा
सारे जहाँ में मैं, शोर मचाऊँगा
वो ही है मेरा परिवार,
वो दाता है जगदीश्वर
जिसने रचाया……

  1. ये जीवन अनमोल दिया,
    कुछ भी ना बदले में लिया
    ओ ‘सचिन’ तेरे ऊपर,
    उसने ये अहसान किया ।।

कुछ तो उसको जानो,
थोड़ा सा पहचानो है
वो तो सर्वेश्वर,
सब उसको ही मानो
हो नगमा दोहराऊँगा,
अब ना घबराऊँगा
उसकी महिमा आगे,
मस्तक झुकाऊँगा ।
मेरा है वो ही घर बार,
वो दाता है जगदीश्वर
जिसने रचाया……