हिन्द का विजय निशान व्योम में उछाल दो।
हिन्द का विजय निशान व्योम में उछाल दो।
दुश्मनों को देश की जमीन से निकाल दो॥
शत्रु की चुनौतियां रोज तो न आयेंगी।
खौफनाक बदलियां रोज तो न आयेंगी॥
नाजनीन घाटियाँ रोज कब बुलायेंगी।
देश के शरीर में नवीन खून डाल दो ॥1॥
दुश्मनों को देश की….
युद्ध में पछाड़ दो सर्प आस्तीन का।
पहले भी तो कर चुके सामना कमीन का॥
मुक्त हिस्सा करना है हिन्द की जमीन का।
देश के समुद्र में फैला अपना जाल दो॥2॥
दुश्मनों को देश की….
तेज और भाइयों तेज करो आग को।
आंधियाँ न सोख लें देश के चिराग को॥
भाल से खरोच दो स्याह-स्याह दाग को।
नाच-नाच युद्ध में झूम-झूम ताल दो ॥३॥
दुश्मनों को देश की….
वक्त है कि नींद को धिक्कार है धिक्कार है।
है छली प्रपञ्ची दुश्मन वैसे भी गद्दार है॥
फिर बदल जा सन्धि करके बदला बार-बार है।
नीच उस कपटी के मुख में,
गन की अपनी नाल दो॥4॥
दुश्मनों को देश की….










