हे रक्षक !! स्तुतिमय परमेश्वर

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हे रक्षक !! स्तुतिमय परमेश्वर

हे रक्षक !! स्तुतिमय परमेश्वर
आनन्द रत हों मन के भीतर

तेरा प्रकाश आनन्द जगाएँ
दोष दूर कर सफल बनाएँ
प्रेम की शक्ति दो जगदीश्वर
आनन्द रत हों मन के भीतर

साथ ना पापी सत्कर्मी का
पाएँ फल सब निज करनी का
सदा दूर रहें दुरित से ईश्वर
आनन्द रत हों मन के भीतर

निन्दा द्वेष से प्रभु बचा दे
सात्विक प्रेम की राह बता दे
दुर्गुण दोष रहित हमको कर
आनन्द रत हों मन के भीतर

अप्रशस्त मन भाव भगाएँ
जीवमात्र में प्रेम बहायें
जगें प्रेममय मन के ही स्वर
आनन्द रत हों मन के भीतर
हे रक्षक !! स्तुतिमय परमेश्वर
आनन्द रत हों मन के भीतर