हे प्रेरक सविता सर्वप्रकाशक
हे प्रेरक सविता सर्वप्रकाशक !,
जीवन-यज्ञ प्रकाशित करो,
जादू भरी वाणियाँ सब मधुरतम,
हमको सुना कर मधुर रस भर दो,
यद्यपि अनुभवी मात-पिता,
आचार्य ऋषि सन्यासी प्रेरक,
किन्तु महत्त्व स्रोत सविता
प्रभु हैं बोलते वाणियाँ अन्तस् ,
करते उद्बोधन वाणियाँ ‘परा’ से,
बीच का द्वार खुले तो सुनो,
हे प्रेरक सविता
सूर्य में सविता रूप को देखो,
भूमण्डल पे जो छा जाता है,
होके प्रकाशित बन के प्रकाशक,
भक्त हृदयों में समा जाता है,
आलस्य त्यागो नींद से जागो,
अभ्युदय जीवन का प्रतिदिन करो,
हे प्रेरक सविता
सूर्य मध्यान्ह का देख लो भक्तों,
उज्जवल ज्योति प्रखर तेज वाहक,
उद्बुद्ध उज्जवल ज्योति प्रखरता,
लाकर जीवन में बने हो नायक,
अत्याचार अविद्या अन्याय,
द्वेष, भ्रष्टाचार हिंसा हरो,
हे प्रेरक सविता
अपने शुभ गुण कर्म स्वभावों से,
आर्यत्व का भी प्रसार करो,
और चक्रवर्ती आर्य साम्राज्य से,
मानव-समाज का उद्धार करो,
एक ही मानवता ध्वज के नीचे ही,
वैदिक धर्म-प्रचार करो
हे प्रेरक सविता
सविता परमेश्वर की वाणियाँ ,
हमको सुनाई देती रहें,
प्राण तरुण भी जाग उठें,
लहरें मनीषा की ऊंची उठें,
मन और आत्मा हो आनन्दमय,
सविता का हृद में सत्कार करो,
हे प्रेरक सविता
ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ हैं हम
हृदय में भाव हों ऐसे प्रपन्न
विश्व को एक ही ध्वज के तले
लाएँ हृदयों में जाग उठे प्रेम तरंग
हे सविता देव! अपनी जादूभरी
वाणियाँ हमको सुनाते रहो
हे प्रेरक सविता सर्वप्रकाशक !,
जीवन-यज्ञ प्रकाशित करो










