कृतज्ञता
हे प्रभु ! तुझसा ना कोई, विश्व का रखवाल है।
एक तू सारे जगत् का, कर रहा प्रतिपाल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई…….।।1।।
सर्वदा सर्वत्र व्यापक, शुद्ध और चेतन महा।
कान बिन सब सुन रहा, तू विश्व भर का हाल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई……..।।2।।
है सभी कारीगरों में मुख्य कारीगर तू ही।
हाथ बिन सब रच रहा, सारे जगत् का जाल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई………।।3।।
आदि सृष्टि में दिया, उपदेश सब वेदों का ज्ञान।
वाक् इन्द्रिय के बिना, कितना बड़ा वाचाल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई……..।।4।।
सर्वदृष्टा और तू सर्वज्ञ होने से प्रभो!
आँख बिन देखे सभी दुनिया की चालो-ढाल है।
हे प्रभु ! तुझसा न कोई……..
दौड़ने वालों से पहले है वहाँ मौजूद तू।
चल रहा बिन पद अहा! कैसी अनोखी चाल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई…… ।।6।।
भर रहा धन-धान्य से, तू ही सबके परिवार को।
पास कौड़ी है नहीं, पर सबसे मालामाल है।
हे प्रभु! तुझसा न कोई……..।।7।।
तेरी सानी का कोई भी, दूसरा पाया नहीं।।
तू कभी जन्मा नहीं है, और न तेरा काल है
हे प्रभु ! तुझसा न कोई………।।8।।
है तेरी माया अलौकिक, किस तरह गायन करें।
तुच्छ बुद्धि यह तेरा सेवक ‘किशोरी लाल’ है।
हे प्रभु ! तुझसा न कोई …,…….










