हे प्रभु ! मेरे परम सखा !

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हे प्रभु ! मेरे परम सखा !

हे प्रभु ! मेरे परम सखा !
तुम्हीं बन्धु हो, तुम्हीं सनेही,
तुम्हीं हो मात-पिता
दुःख में धीरज देने वाले,
कष्टों में सुध लेनेवाले
तुम्हीं सहाय सदा,
हे प्रभु ! मेरे परम सखा

कभी प्यार से पिता पुकारूँ,
कभी बन्धु कह तन-मन वारूँ
कभी स्नेह से कहूँ सखा,
हे प्रभु ! मेरे परम सखा

तुम्हीं हमारे पथ-दर्शक हो,
पूर्ण हमारे हितचिन्तक हो
तुम्हीं से हृदय मिला,
हे प्रभु ! मेरे परम सखा

रचनाकार:- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई

स्वर :- श्रीमती अदिति जी शेठ