हे परमेश ! बृहस्पति !

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हे परमेश ! बृहस्पति !

हे परमेश ! बृहस्पति !
वेदवाणी के अधिपति !
ज्ञान के तुम ही हो अधीश्वर
शुद्ध स्वरूप हो ‘पप्रि’
हे परमेश ! बृहस्पति !

तुम ही सबके हृदयों में बैठे
कर्तव्य और संकल्प की
ज्ञान धारा को बहा रहे हो
धारा है यह सत्कर्म की
हे परमेश ! बृहस्पति !

सबके जीवन के पूर्णताकारक
शुद्ध स्वरूप हो ‘पप्रि’
शुद्ध करन हारे हम सबके
तुम हो हमारे सस्त्री
हे परमेश ! बृहस्पति !

जिसके सखा तुम, बन जाते हो
उसके व्यवहार निखरते
शुद्धता पूर्णता से अनुकरणीय
जीवन जागृत करते
हे परमेश ! बृहस्पति !

प्रभुजी! हमारे, सखा बन जाओ
जीवन पवित्र कर दो
आत्मा बुद्धि मन, प्राण चक्षु श्रोत
के छिद्रों को भर दो
हे परमेश ! बृहस्पति !

इस संसार में ‘दु:शंस’ ‘दिप्सु’
घात लगाए बैठे हैं
चाहते हैं अपकीर्ति हमारी
बुरी सलाहें देते हैं
हे परमेश ! बृहस्पति !

हे बृहस्पति प्रभु !
तुम हमें इनके
पाशविक चंगुल से बचा लो
शुभ चिन्तन करें
शुभ वाणी बोले
शुभकामनाएं जगा दो
हे परमेश ! बृहस्पति !

बृहस्पति प्रभु ! हमें आशीष दो
करते रहे शुभचिन्तन
होके सुशंस गायें शुभ मंगल
करें शुभ स्वागत हरदम
हे परमेश ! बृहस्पति !
वेदवाणी के अधिपति !
ज्ञान के तुम ही हो अधीश्वर
शुद्ध स्वरूप हो ‘पप्रि’
हे परमेश ! बृहस्पति !