हे जगदीश्वर है भगवान् । (तर्ज- रघुपति राघव राजा राम..)
हे जगदीश्वर है भगवान् ।
बहुत निराली तेरी शान।
विश्वविधाता ईश महान्।
बहुत निराली तेरी शान ।।
अमर अनादि अनन्त अनूपा,
नित्य सनातन सत्य स्वरूपा।
अलख निरञ्जन शक्तिमान,
बहुत निराली तेरी शान ।।
मात पिता बन्धु और भ्राता।
रक्षक पालक तू सुख दाता।
तू सबका प्राणों का प्राण।
बहुत निराली तेरी शान…
मंगल जनक अमंगल हारी।
कष्ट विदारक पर उपकारी।
दीन-दयाकर कृपानिधान।
बहुत निराली तेरी शान…
पतित सुपावन शंकर स्वामी,
परम सहायक अन्तर्यामी।
पथिक करें तेरा गुणगान,
बहुत निराली तेरी शान…।।










