हे जगदीश्वर ! भव दु:खहारी शरणागत हमशरण तिहारी

0
47

हे जगदीश्वर ! भव दु:खहारी शरणागत हमशरण तिहारी

हे जगदीश्वर !!
भव दु:खहारी
शरणागत हम
शरण तिहारी


तुम ही हो वरणीय प्रभु जी
चित्त विनोदन हारी
हे जगदीश्वर !!
भव दु:खहारी
शरणागत हम
शरण तिहारी
हे जगदीश्वर !!

हूँ अभिषिक्त प्रेम में तेरे
हूँ अभिभूत ज्योति में तेरी
दिव्य-मति नित-बुद्धि दान दो
दिव्य हो सद् गति मेरी


हे जगदीश्वर !!
भव दु:खहारी
शरणागत हम
शरण तिहारी
हे जगदीश्वर !!

दु:ख विनाशक जगत् पति जय
भक्तजनन हित शरण
दुर्जन पीड़क – सज्जन पालक
सुर नर वन्दित चरणा


सकल दैव हो – तुम्हें हो अर्पित
चित्त हो सदा – रमा नित तुम में
यन्त्र बनूँ, प्रति रूप बनूँ तेरा
यह वर दो उपकारी


हे जगदीश्वर !!
भव दु:खहारी
शरणागत हम
शरण तिहारी
हे जगदीश्वर !!

मन में हो बस, मनन तेरा ही
हृदय में तेरी भक्ति
नयनों में नित तेरा दर्शन
काया में तेरी शक्ति


तेरे निनाद से चरण हो झंकृत
बुद्धि में निश्चय तेरा ही
तेरा नाम रटे ये रसना
कर्म स्वयं ? पर भारी


हे जगदीश्वर !!
भव दु:खहारी
शरणागत हम
शरण तिहारी
हे जगदीश्वर !!