हे अग्ने! हम तुझको पुकारें

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हे अग्ने! हम तुझको पुकारें

हे अग्ने ! हम तुझको पुकारें
सुन ही लेना पुकार

पाप बन्धन में उलझ गए हैं
तुम बिन किसे बताएँ ?
तुम रक्षा के साथ सम्भालो
पाप दुरित जो सताएँ
करने लगा मन तेरा मेरा
पापी मन लाचार
सुन ही लेना पुकार

नि:सन्देह तुम तो परम हो
रक्षा हेतु ‘अवम’ हो
अनुभव निकटता अपनी कराओ
तुम तो पाप-प्रशम हो
आया देखो आज नया दिन
कर दो प्रकाश-संचार
सुन ही लेना पुकार

शुभ प्रभात में आओ निकटतम
और हमें अपनाओ
तुम्हें रिझाने कब से लगे हैं
हम पर तरस तो खाओ
तुम बिन किससे कहें खिवैया
जीवन दो ना सँवार
सुन ही लेना पुकार

त्याग संयम, तप, नियम भी माने
छोड़ा नहीं कोई साधन
फिर भी क्यों स्वीकार किया ना
प्यारे सजीले साजन !
आत्म-बलि की भेंट है हाथ में
अब तो करो स्वीकार
सुन ही लेना पुकार

हे अग्ने ! हम तुझको पुकारें
सुन ही लेना पुकार