हरि का ध्यान लगावो समय जाये
हरि का ध्यान लगावो समय जाये,
हरि का ध्यान लगाओ।
विषय पाप सब मन से त्यागो,
प्राण पवन ठहरावो ।
सत्-चित्-आनन्दस्वरूप में,
प्रेम मगन हो जावो ॥ सम० ॥
ईश्वर के गुण चिन्तन करके,
वैसा ही चित्त बनावो ।
वही बर्ताव करो जग भीतर,
तब आनन्दपद पावो ॥ सम० ॥
मन का मनका सत्य का धागा,
ज्ञान का चक्र घुमावो ।
ओं शब्द को अर्थ सहित भज,
इतउत क्यों भ्रमावो ॥ सम० ॥
घर को छोड़ बाहर कहाँ जावो,
क्यों मन को भटकावो।
‘नवलसिंह’ कहे घटके मठ में,
हरि सों प्रीति लगावो ॥ सम० ॥










