हरदम है तैयार तू पाप कमाने के लिए।

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हरदम है तैयार तू पाप कमाने के लिए।

हरदम है तैयार तू
पाप कमाने के लिए।

कुछ तो समय निकाल
प्रभु गुण गाने के लिए।।
गर्भकाल में कौल किया था,
नाम जपूंगा मैं तेरा।
इस झूठी दुनियाँ में आकर,
नाम भूल गया मैं तेरा।
ऋषि मुनि सब आते है,
समझाने के लिए।।१।।

जब तक तेल ‘दिये’ में बाती,
जगमग जगमग हो रहा।
जल गया तेल बुझ गयी बाती,
ले चल ले चल हो रहा।
चार जने मिल जाते है,
ले जाने के लिए।।२।।

हाड़ जैसे सूखी लकड़ी
केश जले जैसे घास रे।
कंचन जैसी काया जल
गयी कोई न आया पास रे।
अपने पराये रोते हैं,
दिखलाने के लिए।।३।।