हम तेरे उपासक माँग रहे
हम तेरे उपासक माँग रहे,
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
हे सविता!! मेधा विद्या दो
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
बुद्धि बल से ही मानव का
उत्कर्ष यथावत् सम्भव है
गायत्री मन्त्र में माँगा है
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
हे देव उपास्य, उपासक के
सब पाप दुरित-दुःख दूर करो
हम भद्र कहें और भद्र सुनें
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
हम भौतिक भोग न माँग रहे
जितने भी मिलें पर्याप्त हैं वे
जो अन्तःकरण तम नष्ट करे
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
जीवन क्या है – मृत्यु क्या है
क्यों आये मानव योनि में
इन गूढ़ रहस्यों को समझें
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
इस पावन वेला में मिलकर
हम यज्ञ याचना पाल करें
भव सागर पार उतरने को
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
हम तेरे उपासक माँग रहे,
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो
हे सविता!! मेधा विद्या दो
भगवान् !! हमें सद्बुद्धि दो










