हमें निश दिन जो तड़पाये

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हमें निश दिन जो तड़पाये (धुन- नीले पर्वतों की धारा)

हमें निश दिन जो तड़पाये
दुख ऋषियों ने बताये।
तीन प्रकार के, शत्रु भयानक हैं
सारे संसार के । । टेक ।।

अति वृष्टि और अनावृष्टि
भूकम्प आदि आधिदैविक दुख।
दो प्रकार लड़ करके
इनसे पा सकते हैं जीवन में सुख।।

लेकर ईश्वर का सहारा
उत्तम आचरणों के द्वारा।
इन्हें संभारके शत्रु भयानक हैं
सारे संसार के ।।1।।

सांप और बिच्छु टिड्डी मच्छर
डाका युद्ध हो कलह परस्पर
ये आधिभौतिक शत्रु हैं
परास्त करो इनको भी लडकर ।।

जो विध्वंसक शक्ति सारी
बना लो यथा सम्भव उपकारी।
या संहार के, शत्रु भयानक हैं
सारे संसार के।।2।।

आधिदैविक आधिभौतिक
दोनों प्रकार के दुख हमारे ।।
अध्यात्मिक शत्रु के खेल हैं
चलते है इनके ही सहारे ।।
है अज्ञान अभाव दोष स्वार्थ
आलस्य और विक्रोश।
विषय विचार के शुत्र भयानक हैं
सारे संसार के । ।3।।

आज का मानव समाज दुखी है
इन तीनों दुःखों के कारण।
वैदिक शिक्षा साधन
द्वारा हो सकता है इनका निवारण ।।

आओ प्रेमी शोभाराम बिगड़े
संवारे सब काम।
इस परिवार के शत्रु,
भयानक हैं सारे संसार के।।4।।