हम ना जाने किस दिशा में खो गए

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हम ना जाने किस दिशा में खो गए

हम ना जाने
किस दिशा में
खो गए
विषयों में रह,
दूर प्रभु से हो गए
हम न जाने
किस दिशा में
खो गए

ज्ञान का दीपक नहीं
प्रेम की बाती नहीं
जग में खोए,
तेरी प्रभु
याद क्यों आती नहीं?
विषयों से जीवन बंधा
पा ना सके दरस तेरा
दरस तेरा
दरस तेरा
दरस तेरा
हम ना जाने
किस दिशा में
खो गए

बार-बार भटके मन
घुट के रह जाते हैं हम
कर ना पाए हम सत्संग
हो ना पाए तेरा भजन
हे प्रभु !! है प्रार्थना
तेरा अमृत मुझे पिला
मुझे पिला
तू पिला
मुझे पिला
हम ना जाने
किस दिशा में
खो गए

दो प्रभु बुद्धि प्रवर
भटकें ना हम दरबदर
भक्ति-अमृत पाके हम
तरणी तेरी से जाएं तर
ओ३म् ज्योति मन में जगा
मन से विदा ना हो विद्या
दो प्रभा
दो प्रभा
दो प्रभा
हम ना जाने
किस दिशा में
खो गए
विषयों में रह,
दूर प्रभु से हो गए
हम न जाने
किस दिशा में
खो गए