हम जो मूर्त्ति पूजा छोड़ ओ३म् नाम जपते-२

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हम जो मूर्त्ति पूजा छोड़ ओ३म् नाम जपते-२

हम जो मूर्त्ति पूजा छोड़,
ओ३म् नाम जपते-२ बस यही
बात जमाने को बुरी लगती है ।
हम जो पुराणों को त्याग,
वेद-शास्त्र पढ़ते हैं । बस यही
बात जमाने को बुरी लगती है ।

अन्तरा – हमने इक बार नहीं
बार-बार देखा है मूर्त्तिपूजा करने
वाले पाते कितना धोखा हैं।
जब नित्य वेदधर्मो संध्या यज्ञ
करते हैं-२ बस यही बात
जमाने को बुरी लगती है ।।१ ।।

हमारी गलतियां समझाने दो
विद्वानों को हर शुभकर्म बुरी
लगती है पाखंड़ी को-२
हमारी नस-नस वेफा,
बनके लहु बहती है-२
बस यही बात जमाने को
बुरी लगती है ।।२।।

प्रभु नर तन दिया शुभ कर्म करने
को शुभ कर्म करते हुए मुक्ति
द्वार जाने को-२ जब सदा
दानी-ध्यानी सुपथ से विचरते हैं ।
बस यही बात जमाने को
बुरी लगती है ।।३।।
हम जो मूर्त्तिपूजा छोड़…।।