हम आये शरण तुम्हारी
हम आये शरण तुम्हारी,
प्रभु आये शरण तुम्हारी ।
अन्तरा – हर कुटिया में अमृत भर दो,
रोम-रोम सब पुलकित करदो ।
हम तेरे बने पुजारी,
हम आये शरण तुम्हारी…।।१।।
मिठे-मिठे वचन सुनाये,
फुल बने सबको महकाये।
होकर हम हितकारी ।
हम आये शरण तुम्हारी…।।२।।
बुरे-भले सब तेरे भगवन,
आशानन्द है तेरे अर्पण ।
भिक्षा डाल भण्डारी,
हम आये शरण तुम्हारी…।।३।।










